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बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खेती ज्यादातर प्राकृतिक ही है- श्री रामकेष निषाद, मा0 मंत्री

दिनाँक-04.11.202

 

*बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खेती ज्यादातर प्राकृतिक ही है- श्री रामकेष निषाद, मा0 मंत्री

 खेती में अभिरूचि तथा बुन्देलखण्ड मेें जलवायु परिवर्तन के कारण पलायन शुरू हुआ। पलायन किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कृषकों, युवाओं एवं आम जनमानस को खेती की तरफ जोड़ना होगा। इस कार्य में वर्तमान सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। कृषि विश्वविद्यालय बाँदा द्वारा आयोजित हो रहे इस मेले का भी यही उद्देश्य है कि प्राकृतिक खेती की तरफ कृषकों को जागृत किया जाये। बुन्देलखण्ड में शुरू से ही रसायनिक खादों का प्रचलन अत्यन्त कम है। खेती-किसानी के लिए इच्छा शक्ति को और बढ़ाना होगा। प्राकृतिक खेती में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा वैज्ञानिक अवधारणा से कार्य किया जा रहा है जो काबिले तारीफ है। ललितपुर, महोबा, झाँसी तथा चित्रकूट के किसान लगभग प्राकृतिक विधि से ही खेती कर रहें हैं, अतः इस क्षेत्र को प्राकृतिक खेती का हब बनाया जा सकता है। वैज्ञानिक सलाह से कृषक खेती में और आय बढ़ा सकता है। इस मेले के माध्यम से कृषक सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सकते हैं। इस कृषक हितैसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेन्द्र प्रताप सिंह तथा निदेशक प्रसार, डॉ0 एन0 के0 बाजपेयी निश्चित तौर पर बधाई के पात्र हैं। यह वकतव्य बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा में दिनाँक 03 से 05 नवम्बर, 2022 को आयोजित हो रहे 3 दिवसीय किसान मेला के दूसरे दिन प्राकृतिक कृषि-वर्तमान परिदृश्य एवं रणनीतियाँ विषयक तकनीकी कार्यशाला में मा0 मंत्री, जल शक्ति, श्री रामकेश निषाद जी बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

प्राकृतिक कृषि पर कार्यशाला का आयोजन एपेडा के सौजन्य से किया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष डॉ0 आर0 के0 सिंह, सह-अध्यक्ष डॉ0 जगन्नाथ पाठक, डॉ0 दिनेश शाह व सदस्य सचिव डॉ0 अमित कुमार सिंह रहे। प्राकृतिक खेती पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ0 अजय कुमार सिंह, डॉ0 प्रिया अवस्थी, डॉ0 अमित कुमार मिश्रा, डॉ0 अमित कुमार सिंह तथा श्री के0 एस0 तोमर व डॉ0 महरूफ अहमद ने व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता कृषि प्रो0 जी0 एस0 पवार तथा संचालन डॉ0 जगन्नाथ पाठक ने किया। अपेडा के महा प्रबंधक श्री वी0 के0 विद्यार्थी ने जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक खेती पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से जंगलों, जानवरों एवं अन्य परिस्थितिक तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है। प्राकृतिक उत्पाद से निर्यात बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उद्योग में 2.9 प्रतिशत तथा कृषि में 3.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। भारतवर्ष में प्राकृतिक खेती को अपनाकर विश्व में अलग पहचान बना सकता है। इसमें अपेडा विश्वविद्यालय के माध्यम से कृषकों को मदद करने के लिए हमेशा तत्पर है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो0 नरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मेला में प्रतिभाग करने वाले कृषक निश्चित तौर पर लाभ उठायेंगे। बुन्देलखण्ड में चित्रकूट को केन्द्र बनाकर पर्यटन विकसित किया जाये जिसमें कृषकों की आमदनी तथा तकनीकी विकास में मदद मिलेगी। बुन्देलखण्ड प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी क्षेत्र बनेगा। इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तकनीकी सलाह के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। विश्वविद्यालय द्वारा बुन्देलखण्ड की प्राकृतिक खेती एवं उत्पाद के ब्राण्डिग के लिए योजना बना रहा है। विश्वविद्यालय इस वर्ष उच्च उत्पादकता वाली बीज उत्पादित करके कृषकों हेतु उपलब्ध कराया है, भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादित करने की योजना है। यह विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का अग्रणी विश्वविद्यालय बनेगा ऐसा प्रयास है। किसान मेले में आज दूसरे दिन भी किसान भारी संख्या में प्रतिभाग किये। महिला किसानों की संख्या भी ज्यादा रही। पशु प्रतियोगिता में विभिन्न नस्लों की बकरियाँ, बकरे, भेड़ एवं मुर्गे पशु पालकों द्वारा लाये गये थे, जो मेले के आकर्षण का केन्द्र थे। इस प्रतियोगिता का आयोजन डॉ0 मयंक दुबे एवं डॉ0 मानवेन्द्र सिंह द्वारा कराया गया था। मेले में सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र कृषि प्रसार विभाग के स्नात्कोत्तर के छात्रों द्वारा बनाया गया सेल्फी पॉइन्ट रहा, जहाँ पर सभी आगंतुक छात्र-छात्रायें, किसान, वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों को फोटो खिचाते हुए देखा गया। किसान मेले के आयोजक सचिव एवं निदेशक प्रसार, डॉ0 एन0 के0 बाजपेयी ने सभी अतिथियों, आगंतुकों, सम्मानित किसान बन्धुओं, छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। डॉ0 बाजपेयी ने इस मेले के उद्देश्य एवं रूप रेखा को विस्तार से बताया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन सह निदेशक प्रसार, डॉ0 नरेन्द्र सिंह तथा कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ0 धीरज मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक, राजीव कुमार झा, पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष, श्री लवलेश सिंह व अन्य गणमान्य व्यक्ति मंचासीन रहे।

एक अन्य कार्यक्रम में बकरी पालन की वैज्ञानिक विधि का कार्यशाला रखा गया। कार्यशाला का आयोजन केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मकदूम, मथुरा द्वारा आयोजित किया गया था। यह कार्यशाला अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना के अन्तर्गत आयोजित की गयी थी जिसमें लगभग 100 कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अथिति केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ0 ए0 के0 दिक्षित विशिष्ट अतिथि डॉ0 मनोज अवस्थी, उप निदेशक पशुपालन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक प्रसार, डॉ0 एन0 के0 बाजपेयी ने की। कार्यशाला में डॉ0 जी0 एस0 पवार, डॉ0 संजीव कुमार, डॉ0 सोमवंशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ0 मयंक दुबे तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 मानवेन्द्र सिंह ने किया।

 

 

 

 

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