बांदा -आत्मा योजनान्तर्गत आज दिनांक 23.12.2022 को स्व० श्री चौ० चरण सिंह जी मा० पूर्व
प्रधानमंत्री के जन्म दिवस को किसान सम्मान दिवस के रूप में कृषि विभाग प्रांगण बॉदा में मनाय
गया, इस अवसर पर जिलाधिकारी महोदया बॉदा द्वारा फीता काटकर कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन
किया गया एवं कृषि सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाये गये स्टॉलों का अवलोकन किया गया।
तत्पश्चात स्व० चौ० चरण सिंह जी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुये दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का
शुभारम्भ किया गया। उप कृषि निदेशक बॉदा द्वारा सभी आगन्तुकों का स्वागत करते हुये कार्यक्रम की
रूपरेखा प्रस्तुत की गयी ।
जिलाधिकारी महोदया बॉदा द्वारा कृषकों से अपील की गयी कि खेती में विविधीकरण अपनायें एवं
जैविक खेती पर जोर दें। आने वाला समय जैविक खेती का ही होगा। यहाँ की मिट्टी की जलधारण
क्षमता अधिक नहीं है, जिसके लिये वर्षा जल की एक-एक बूंद के संरक्षण हेतु प्रत्येक किसान को
खेत- तालाब बनाने की आवश्यकता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर फसलों की जीवनदायी सिंचाई
की जा सके। समेकित खेती प्रणाली पर जोर देते हुये उनके द्वारा कहा गया कि प्रत्येक विकासखण्ड
में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विश्वविद्यालय सम्मिलित प्रयास से एक-एक आई0एफ0एस0
मॉडल विकसित करें, जिससे कि क्षेत्रीय कृषक प्रेरित होकर समेकित खेती की ओर अग्रसर हो सकें।
साथ ही उनके द्वारा अवगत कराया गया कि बच्चियों एवं जनमानस के लिये शासन की ओर से बहुत
सी कल्याणकारी योजनायें संचालित की जा रही हैं, जिनका प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है, जिसके
लिये सभी विभाग मिलकर प्रत्येक माह प्रत्येक विकासखण्ड में एक आदर्श कैम्प का आयोजन करायें
जिसमें सभी विभाग अपने-अपने विभाग से संचालित योजनाओं की जानकारी सामान्य जनमानस को
उपलब्ध कराते हुये सरकार की योजनाओं का लाभ पहुॅचायें। जनपद में सम्भावित फसलों महाचिन्नावर,
देसी अरहर एवं कठिया गेहूँ के क्षेत्र विस्तार हेतु उनकी जी०आई० मैपिंग कराने के निर्देश दिये गये
हैं।
अध्यक्ष महोदय जिला पंचायत बॉदा द्वारा अपने सम्बोधन में बताया गया कि देश की प्रगति के
लिये किसान का समृद्ध होना आवश्यक है। सरकार द्वारा किसानों के हित में चलायी जा रही योजनाओं
के माध्यम से किसान को सशक्त बनाया जा रहा है एवं किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास
किये जा रहे हैं। किसानों को आगाह किया गया कि “खेत का पानी खेत में” नारे को सफल बनाने
हेतु कृषक भाई अनिवार्य रूप से अपने खेतों की मेड़बन्दी करायें एवं अपने नलकूप के पास खेत-तालाब
अवश्य बनवायें ।
मुख्य विकास अधिकारी महोदय बॉदा ने अपने सम्बोधन में किसानों से अपील की गयी कि कृषि
विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गयी सलाह को अवश्य
अपनायें एवं पीएम- कुसुम योजनान्तर्गत अनुदान पर लगवाये जा रहे सोलर पम्प लगवाकर सिंचाई के
क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने।
डा० अनिकेत कोल्हापुरे वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय बॉदा द्वारा समेकित खेती प्रणाली
के सम्बन्ध विस्तृत जानकारी दी गयी एवं कृषकों से अपील की गयी कि आई०एफ०एस० मॉडल को
अपनायें जिससे कि सालभर निरन्तर आय प्राप्त होती रहती है एवं वर्षा जल संचयन पर जोर दिया
गया।
कृषि विश्वविद्यालय बॉदा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० आनन्द सिंह द्वारा खेती को आन्दोलन के
रूप में लेने की सलाह दी गयी एवं हो रहे जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढलने हेतु प्रेरित किया गया ।
उनके द्वारा यह भी कहा गया कि अन्ना प्रथा खेती के लिये अभिशाप है, किन्तु इसके लिये हम सभी
किसान भाई ही जिम्मेदार हैं।

या गया।