बांदा। अंशू गुप्ता जसपुरा कस्बे के निवासी द्वारा जसपुरा थाने में तैनात उपनिरीक्षक मोहम्मद अकरम के खिलाफ माननीय मुख्यमंत्री के यहां दिनांक 7/12/2022 प्रार्थना पत्र देकर शिकायत किया था। जिस पर जांच सीओ सदर बांदा को मिली थी लेकिन सीओ सदर के द्वारा आइजीआरएस में फर्जी निस्तारण कर दिया गया। शिकायत में जिन लोगों के हलफनामा और शिकायती पत्र दिए गए थे उन लोगों के बयान भी नहीं लिए गए और थाने के दलाल जो हर महीने डग्गामार वाहनों से पैसे वसूलते है। और रात में नंबर दो की बालू चलाते हैं। उनके स्वतंत्र गवाह बनकर गवाह में नाम डालकर निस्तारण कर दिए गए है। जबकि आईजीआरएस संख्या 12170220243560 मामले में उपनिरीक्षक मोहम्मद अकरम के खिलाफ हलफनामे देने वाले प्रधान प्रतिनिधि सहित एक दर्जन लोगों ने शिकायत किया था। लेकिन सीओ सदर ने किसी भी शिकायतकर्ता के बयान नही लिए हैं और फर्जी निस्तारण कर दिया और बयान लिए तो थाने के दलाल और डग्गामार वाहनों के चालकों से जिनकी गाड़ियां पहले थाने में खड़ी करा दी गई थी इसके बाद बयान लेने के बाद छोड़ दिया गया। उनको यह भी नहीं बताया गया कि किस संबंध में उनसे बयान लिए जा रहे हैं। केवल नाम पता लिख लिया।ना जाने क्योंकि भ्रष्टाचार में डूबे मोहम्मद अकरम दरोगा को ना जाने क्यों बचाने में लगी है बांदा की पुलिस इसके पहले भी भ्रष्टाचार में डूबे दरोगा मोहम्मद अकरम के खिलाफ बदौसा थाने में भी महिलाओं ने प्रदर्शन किया तब जाकर वहां से इनको हटाया गया था। मोहम्मद अकरम दरोगा पड़ोसी जनपद चित्रकूट बांदा बॉर्डर के पहाड़ी ब्लाक के डांडीखास गांव के रहने वाले हैं। जो जिले के बॉर्डर में रहकर भ्रष्टाचार में रहकर माफियाओं से मिलकर बहुत ही अधिक मात्रा में संपत्ति बना ली हैं इनकी तो संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए वही अंशु गुप्ता ने बताया कि यही हलफनामे लेकर वह जल्दी मुख्यमंत्री से मिलकर भ्रष्टाचार में डूबे दरोगा के खिलाफ संपत्ति जांच कराकर भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों के खिलाफ भी कारवाही की मांग करेगा।