कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,
बांदा, दिनांक 01.12.2022 | राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीया जिला जज / अध्यक्षा श्रीमती कमलेश कच्छल जी के निर्देशानुसार आज दिनांक 01.12.2022 को अर्न्तराष्ट्रीय एच०आई०वी०/एड्स दिवस के अवसर पर अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत – बांदा श्रीमान कमलेश दुबे जी की अध्यक्षता में जनपद बांदा के कालीचरन निगम प्रौद्योगिकी संस्थान, बांदा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया गया ।
शिविर में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण – बांदा श्रीमान बी०डी० गुप्ता जी द्वारा अपने सम्बोधन में संविधान के भाग 3, 4 व 4ए में निहित मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निदेशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्यों के बारे में एवं अनुच्छेद-39ए के अन्तर्गत विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के उद्देश्यों के बारे में विस्तारपूर्वक व्याख्यान किया गया। सचिव महोदय द्वारा बताया गया कि भारत का संविधान विश्व विशालतम संविधान है, यह संघात्मक एवं एकात्मक संविधान का मिश्रण है। मौलिक अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मान से जीने का अधिकार प्रदान करता है। ए०डी०आर० का मध्यस्थता केन्द्र लोगो को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जिसमें वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इसमें मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत – बांदा श्रीमान कमलेश दुबे जी द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा – 22बी के अन्तर्गत स्थायी लोक अदालत व ए०डी०आर० और मध्यस्थता के विषय पर बोलते हुए कहा कि मध्यस्थता के द्वारा कई विवादो का निपटारा किया जा सकता है। इससे सम्बन्धित व्यक्तियों के समय एवं धन की बचत होती है और अपनी समस्या का शीघ्र समाधान भी पा लेते है। इस समझौते का वैधानिक महत्व भी है। इसलिए सम्बन्धित पक्ष स्वयं को अधिक सन्तुष्ट पाते है। इसमें मध्यस्थ के रुप में मीडिएटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वही तथ्यों को समझ कर समस्या का कानूनी समाधान प्रस्तुत करते है। इस सम्बंध में अन्तिम आदेश माननीय सक्षम अधिकारी का होता है। अतः इसमें त्रुटि की सम्भावना लगभग नगण्य होती है।
चेयरमेन, कालीचरन निगम प्रौद्योगिकी संस्थान – बांदा श्री अरुण निगम जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजनों से जागरुकता आती है और हर प्रकार के लोगो को न्यायिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है। आम जनता को भी लीगल लिटरेशी को लाभ मिलता है।
निदेशक, कालीचरन निगम प्रौद्योगिकी संस्थान – बांदा डा० अजीत कुमार सिंह द्वारा संविधान की महत्ता समझाते हुए आगे आने वाल पीढ़ी को इसके गौरव से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि किसी देश का संविधान उस देश की आत्मा होती है। वह देश की दशा और दिशा को प्रतिबिम्बत करता है। इसी आधार पर कोई देश आगे बढ़ता हुआ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है।
श्री अनुराग तिवारी, अधिवक्ता – लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल द्वारा एचआईवी० / एड्स दिवस के अवसर पर छात्र-छात्रओं को इस गम्भीर बीमारी के लक्षणों व इससे बचने उपायों पर विस्तार से व्याख्यान किया गया ।
श्री विद्यासागर द्विवेदी – अधिवक्ता, बांदा एवं श्रीमती रुबी जैनब, पराविधिक स्वयं सेवक द्वारा भी उक्त विषय पर सम्बोधन किया गया ।
शिविर के अन्त में डा० प्रशान्त कुमार, प्रवक्ता- कालीचरन निगम प्रौद्योगिकी संस्थान, बांदा द्वारा उपस्थित आये मुख्य अतिथियों व उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया ।

विर में श्री राशिद अहमद – डी०ई०ओ०, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा के साथ कॉलेज का समस्त स्टाफ व छात्र छात्राएं मौजूद रहे। जारी प्रेस विज्ञप्ति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा।