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पात्रों का नाम आने के बावजूद भी काटा गया नाम व अपात्रों और चहेतों को दिए गए आवास

प्रधानमंत्री आवासों के लिए जनता से मांगी जा रही रिश्वत

 

 

पात्रों का नाम आने के बावजूद भी काटा गया नाम व अपात्रों और चहेतों को दिए गए आवास

 

बबेरू ब्लाक अन्तर्गत टोला कला गांव के ग्रामीणों ने सचिव के ऊपर लगाए गंभीर आरोप पैसे ना देने के वजह से आवास लिस्ट से अपात्र किया घोषित आपको बता दें कि पूरा मामला टोला कला गांव से है जहां पर लगभग दो दर्जन महिलाओ ने रो रो कर बताया अपना पूरा दुखड़ा और मौके पर अपना आशियाना दिखाया और घास फूस की झोपड़ी व कच्चे मकानों को दिखाया जो वास्तव में पात्र है विकलांग है खेती मजदूरी कर के अपना भरण पोषण करते है फिर भी सचिव की 20000 की डिमांड पूरी ना करने पर उनको सचिव भवानी सिंह द्वारा अपात्र बनाया जा रहा महिलाओ ने कहा की अवास लिस्ट में नाम आने के बाद भी लिस्ट से नाम काटा जा रहा है और अपने चहेते व जो डिमांड पूरी करते है सचिव की उनका नाम भरा जा रहा है सरकार की सरकारी योजनाओं को गरीबों तक लाख प्रयास किए जाते है और उन योजनाओं का लाभ सीधे गरीबों तक पहुंचाने के अक्सर बड़े बड़े दावे भी किए जाते है लेकिन जिम्मेदार सरकार की मंशा में पलीता लगाने में ही तुले हुए है जिला प्रशाशन लगातार मीटिंगे कर अधिकारियों को निर्देश देते रहते है ।लेकिन अधिकारी व कर्मचारी गरीबों को योजना का लाभ बिना दक्षिणा चढ़ाएं लेने नहीं देते जमीन तक वो योजनाए पहुंचती है लेकिन अधिकतर योजनाएं धनाभाव में गरीबों को नहीं मिलती है।और उसका फायदा पैसे वाले अपात्र लेे जाते है चंद पैसों के लिए सरकार की गरीबों को मिलने वाली योजनाएं अमीरों व अपात्रों के नाम कर दी जाती है शिकायत हुई तो गोल मोल जवाब बनाकर मामले को बंद कर दिया जाता है।इससे लगता है भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होगा। जबकी ग्रामीण इलाकों में लगभग सभी जगह यही हाल है फिर भी अधिकारी भ्रष्टचार करने वाले सचिवों और प्रधानों का खुलेआम करते है बचाव जबकि ऐसे मामलों को संज्ञान लेकर जिलाधिकारी दीपा रंजन को उच्च स्तरीय कमेटी  बनाकर जांच कराना चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और ऐसे कर्मचारियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए अगर जांच में पाया जाता है सच में पैसे लिए गए हैं या पैसे की मांग की गई है तो ऐसे कर्मचारियों को बर्खास्त करने की भी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे दोबारा किसी कर्मचारी की हिम्मत ना पड़ सके गरीब जनता से पैसा मांगने की, क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश चाहते इसी को लेकर वह आगे भी बढ़ रहे हैं परंतु पुराने ढर्रे में ढले कर्मचारी हैं कि मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं और भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूब गए हैं अब देखना यह है कि क्या कार्रवाई होती है क्या गरीबों को पात्रों को आवास मिल पाते हैं या फिर ₹20000 रुपए देने वाले लोगों की ही सुनी जाएगी और आवास उन्हें ही उपलब्ध कराया जाएगा शासन की मंशा को चुना लगाने वाले कर्मचारी आखिर कब तक ऐसी हरकत करते रहेंगे यह तो आने वाला वक्त बताएगा परंतु हम हैं हर खबर पर निगाह बनाए रहेंगे खबर विश्वस्त सूत्रों द्वारा

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