
कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा
माननीय उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जिला जज / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-बांदा डा० बब्बू सारंग जी के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा के तत्वावधान में आज दिनांक 03.09.2024 को (POSH) महिलाओं को लैंगिक शोषण से सुरक्षा प्रदान किये जाने तथा आत्मनिर्भर बनाये जाने एवं लैंगिक शोषण से बचाव के सम्बंध में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन विकास खण्ड परिसा (ब्लाक) महुआ में किया गया। विधिक जागरुकता शिविर की अध्यक्षता श्रीमान श्रीपाल सिंह, अपर सिविल जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा की गयी। विशिष्ट अतिथि के रुप में श्रीमान मुनि कुमार सिंह, अपर सिविल जज (जू०डि०)-बांदा उपस्थित रहें।
श्रीमान श्रीपाल सिंह, अपर जिला जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-बांदा ने अपने सम्बोधन में कहा कि किसी पुरुष द्वारा किसी महिला की इच्छा या सहमति के विरुद्ध उसके कार्यस्थल पर बलात्कार, यौन यातना व क्रूरता के साथ बनाया गया शारीरिक सम्बंध अथवा हत्या या चोट का भय दिखाकर दबाव में यौन सम्बंध के लिये किसी महिला की सहमति हासिल करना एवं 18 वर्ष से कम आयु की किसी महिला के साथ उसकी सहमति या बिना सहमति के यौन सम्बंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में आने वाले गम्भीर अपराध है। इसके लिए आई०पी०सी० की धारा-376 अथवा पाम्क्सो अधिनियम के अन्तर्गत न्यूनतम् सात वर्ष व अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्राविधान है तथा क्रूरता के साथ बलात्कार कर हत्या करने पर मृत्युदण्ड का भी प्राविधान है।
श्रीमान मुनि कुमार सिंह, अपर सिविल जज (जू०डि०) बांदा ने अपने वक्तव्य में कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम-2013 के
अन्तर्गत ऐसी घटनाएं होने पर अभियुक्त को तीन वर्ष से सात वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्राविधान है। अभियुक्त के विरुद्ध आई०पी०सी० की धारा 354 के अन्तर्गत दाण्डिक कार्यवाही भी की जा सकती है। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण से रोकथाम व पॉक्सो एक्ट-2012 के सम्बंध में कहा गया कि 18 वर्ष से कम आयु की किसी महिला के साथ बलात्कार होने पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम-2013 के अन्तर्गत 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष तक की सजा एवं मृत्युदण्ड तक का प्राविधान है। इस अधिनियम के तहत कुछ नये प्राविधान भी शामिल किये गये है जैसे बलपूर्वक किसी महिला के कपड़े उतरवाना, यौन संकेत देना, पीछा करना, अवांछनीय शारीरिक स्पर्श, शब्द या संकेत एवं यौन अनुग्रह आदि। इसके अतिरिक्त अपर सिविल जज महोदय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा महिलाओं को प्राप्त निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
श्रीमती रमा साहू-प्रबन्धक, वन स्टाप सेण्टर, जिला प्रोबेशन कार्यालय बांदा द्वारा अपने सम्बोधन में सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रम संकल्प-HEW के सम्बंध में तथा भ्रूण हत्या के सम्बंध में जानकारी प्रदान की। संकल्प-HEW के अन्तर्गत कानूनी जानकारियां सरल व सहज भाषा में लोगो को उपलब्ध कराना है जिससे कि बच्चियों को सुरक्षित रखा जा सके। भ्रूण हत्या रोकने के लिए महिलाओं को जागरुक किये जाने की आवश्यकता है जिससे वह पारिवारिक दबाव के समय इसका विरोध कर सके। उन्होन बताया कि यह बड़े हर्ष का विषय है कि हमारे जनपद में बच्चियों का लिगानुपात बढ़ा है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। परिवार में बच्चियों के बिना परिवार संतुलित एवं सुखी नही रह सकता। साथ ही उन्होने वन स्टाप सेण्टर द्वारा पीड़ित महिलाओं को प्राप्त अधिकारों व सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं तथा उ०प्र० मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना आदि के सम्बंध में व्यापक जानाकरी प्रदान की।
श्रीमती सुमन शुक्ला, पराविधिक स्वयं सेवक ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश में उचित सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लड़कियों की शिक्षा आवश्यक हैं। पुरुष और महिला दोनो सामाज में दो सामान पहियों की तरह समानान्तर चलते हैं। इसलिए दोनो ही देश के विकास और प्रगति के महत्वपूर्ण घटक हैं। इस प्रकार जब भी शिक्षा की बात आती हैं तो दोनो को बराबर अवसर की आवश्यकता होती हैं। श्रीमती सुमन शुक्ला द्वारा निःशुल्क विधिक सेवाओं हेतु संचालित टोल फी नं0-15100 के सम्बंध में भी जानकारी प्रदान की।
