न्याय पाने के लिये अनशन पर बैठे पीडितो को पुलिस ने जबरन उठाया क्या भाजपा सरकार में सांसद विधायकों के इशारे पर चलेगी पुलिस क्या यही रामराज है
सौ परसेंट विकलांग को अनशन स्थल से उठाना क्या यही न्याय है अगर यही न्याय है ऐसे न्याय को धिक्कार है
बाँदा प्रदेश की योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने का वादा करके दोबारा शासन पर काबिज हुयी हो परन्तु धरातल पर सरकार के मँशा के विपरीत ही प्रशासन कार्य कर रहा है ।
कुछ ऐसा ही मामला जनपद के कोतवाली नरैनी अन्तर्गत से प्रकाश मे आया है । बीते दिनो नरैनी कोतवाली अन्तर्गत दिनाँक तीन फरवरी को पीडिता प्रमिला व बुद्धविलास तिवारी व उमेश तिवारी के साथ विधायिका नरैनी के गुर्गो के द्वारा दिव्याँग बुद्धविलास तिवारी के साथ अभद्र टिप्पणी कर गाली गालौज किया था जिसकी शिकायत कोतवाली नरैनी मे की गयी थी परन्तु विधायिका के दबाव मे पुलिस द्वारा न्याय न मिलने के कारण पीडितपक्ष जिला मुख्यालय मे स्थित अशोक लाट मे अनशन पर बैठ गया ।

ज शुक्रवार लगभग दो बजे नरैनी कोतवाली की गाडी अनशन स्थल पर आई तथा शाँतिपूर्वक कर रहे अनशनकारियो को जबरन पुलिस द्वारा उठा ले गये ।इस घटना से समस्त बुन्देलखँड के दिव्याँगजनो मे भारी आक्रोश है तथा अनशन स्थल पर बुन्देलखँड प्रभारी विकलाँग पार्टी अपने बहुत से सदस्यो के साथ अनशन स्थल पर जमा हो गये है तथा उनकी माँग है कि चौबीस घँटे के अँदर अपराधियो के खिलाफ कार्यवाही नही की गयी तो बृहद आँदोलन किया जायेगा।