कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा
माननीय उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जिला जज / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-बांदा डा० बब्बू सारंग जी के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा के तत्वावधान में आज दिनांक 31.01.2025 को विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन जिला महिला चिकित्सालय, बांदा में किया गया। विधिक जागरुकता शिविर की अध्यक्षता श्रीमान श्रीपाल सिंह, अपर जिला जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बांदा द्वारा की गयी।
सर्वप्रथम श्रीमान श्रीपाल सिंह, अपर जिला जज/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-बांदा द्वारा अपने सम्बोधन में बताया कि कुष्ठ रोग एक जीवाणु रोग हैं जो कि माइकोबैक्टीरिअम लैप्रोई नामक जीवाणु से होता हैं। यह रोग भारत सहित सम्पूर्ण विश्व के पिछड़े हुए देशों के लिए एक ऐसी समस्या हैं जिससे लाखों लोग दिव्यांग हो जाते हैं। कोढ़ नामक बीमारी भी इसी का एक रूप हैं। पश्चिमी देशों में इसका प्रभाव न के बराबर हैं। अपने देश में इस पर काफी नियन्त्रण किया जा चुका हैं। जिन कुष्ठ रोगियों को समाज धिक्कारता हैं उनसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बहुत दया और सहानुभूति रखते थे। इसी कारणश इसे आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्य तिथि पर कुष्ठ रोग निवारण दिवस के रुप में मनाया जाता हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने अपने जीवन में कुष्ठ रोग से पीड़ितों की अत्त्याधिक सेवा की तथा उन्हे समाज की मुख्य धारा में जोड़ने के काफी प्रयास किये। सचिव महोदय द्वारा कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को प्राप्त निःशुल्क विधिक सहायताओं के सम्बंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
डा० संजीव कुमार, जिला चिकित्सालय-बांदा ने कहा कि त्वचा पर घाव होना कुष्ठ रोग के प्रथम बाहरी सकेंत हैं। यदि इसका उपचार न किया जायें तो यह पूरे शरीर में फैल सकता हैं जिससे शरीर की त्वचा, नसें, हाथ-पैर व आखें सहित शरीर के कई भागों में स्थायी क्षति हो सकती हैं। इस रोग से त्वचा के रंग व स्वरुप में परिवर्तन दिखाई देने लगता हैं। कुष्ठ रोग से त्वचा पर रगंहीन दाग हो जाते हैं जिस पर किसी भी तरह की चुभन को कोई असर रोगी पर नही होता हैं। शरीर के कई भाग सुन्न हो जाते हैं। कुष्ठ रोग स्पर्श करने से नही होता हैं तथा ना ही यह वंशानुगत रोग हैं।
श्री दिनेश कुमार, पी.एम.डब्लू, जिला चिकित्सालय-बांदा द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि आज आधुनिक चिकित्सा प्रणाली ने इतनी तरक्की कर ली हैं कि कुष्ठ रोग का इलाज कई वर्ष पूर्व ही सम्भव हो गया था। आज के समय में इस रोग की मल्टी ड्रग थैरपी उपलब्ध हैं। वर्तमान समय में कुष्ठ रोग का इलाज दो प्रकार से हो रहा है। सरकारी चिकित्सालयों में इसका इलाज निःशुल्क किया जाता है। बी.सी.जी. का टीकाकरण कराने से भी कुष्ठ रोग नहीं होता हैं।
डा० सुनीता सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका, जिला महिला चिकित्सालय बांदा ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को देश से कुष्ठ रोग मिटाने के लिए सक्रिय रुप से अपनी भागीदारी निभानी चाहिए तथा कुष्ठ रोग से सम्बन्धित फैली भ्रान्तियों पर लोगो को ध्यान नही देना चाहिए। कुष्ठ से पीड़ित मरीजों एवं लोगो को कुष्ठ रोग के सम्बंध में शिक्षित करना चाहिएं। शिविर में डा० सविता द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किये गये।
शिविर में श्रीमती रमा साहू, प्रबन्धक वन स्टॉप सेण्टर, बांदा द्वारा भी महिलाओं की सुरक्षा व उन्हे आत्मनिर्भर बनाये जाने के सम्बंध में विधिक जानकारी प्रदान की। शिविर का संचालन श्रीमती रमा साहू द्वारा किया गया। डा० सुनीता सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका, जिला महिला चिकित्सालय -बांदा द्वारा आये हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

इस अवसर पर डा० प्रमोद, डा० चारु, श्रीमती अन्जुम निशात, श्रीमती महजबी अन्जुम तथा श्री राशिद अहमद डी०ई०ओ०-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा के साथ श्रीमती महजबी अन्जुम्, रजिया, निकिता सिंह, संजय आदि उपस्थित रहें।