*खाद के लिए भीषण ठंड में किसान सुबह 2 बजे से लाइनें लगाने में विवस है।*
मंडी समिति अधिकारी द्वारा ठंड से बचाव हेतु कोई इंतजाम नही
बांदा: डीएपी खाद की किल्लत कम नहीं हो रही है। अधिकारी चाहे ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हों। मंगलवार को मंडी समिति में इसकी बानगी भी देखने को मिली। लाइन में सुबह से लगे बुजुर्ग किसान सवाल करने के पहले बोल पड़े- ‘साहेब एकय बोरिया खाद देवाय देया, बहुतै मेहरबानी होई’। वहीं आगे लाइन में लगे किसान मोतीलाल बोल पड़े ‘साहेब तीसर दिन आय, दुई बोरिया खाद कै खातिर तीन दिन से लाइन मा लागे हन, अब तौ खेती से जीअए पाक गा है।’
जनपद में जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि खाद की किल्लत सिर्फ इसी वर्ष है। ऐसा हर साल होता है, पर अधिकारी सबक ही लेने को तैयार नहीं है। उनका एक ही जवाब होता है कि किसान दस-दस बोरी खाद लेता है, इसीलिए किल्लत है।
आज मंडी समिति, बांदा में खुले पीसीएफ केंद्र में करीब 300 किसान लाइन में डीएपी खाद के लिए लगे मिले। महोखर से आए किसान रामशरण ने बताया कि चार दिन से रातोंदिन यहां खाद के इंतजार में पड़े हैं। उधर, तैयार खेत खराब हो रहे हैं। सोचा था कि कुछ खेत में मसूर और अलसी-चना बो दिया जाए, इसके लिए खाद की जरूरत है और नहीं मिल पा रही है।

