बांदा, 27 जनवरी, 2023-
श्रीमती आनन्दी बेन पटेल, मा0 राज्यपाल उ0प्र0/कुलाधिपति महोदया, कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा ने आज कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अष्टम दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ किया तथा दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों में स्वर्ण एवं कांस्य पदक छात्र/छात्राओं को पदक प्रदान किये। इससे पूर्व उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित कामदगिरि नंदिनी-नंदिनी अभ्यारण्य का भी उद्घाटन किया
दीक्षान्त समारोह कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए मा0 राज्यपाल/कुलाधिपति ने कहा कि कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा के अष्टम् दीक्षान्त समारोह में सम्मिलित होकर मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद बुन्देलखंड में जो एकता और समरसता है, उसके कारण यह क्षेत्र अपने आपमें सबसे अनूठा है। यहां की प्रकृति, जलवायु एवं जैव विविधता इस क्षेत्र को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिये यह महत्वपूर्ण है कि कृषि शिक्षा युवाओं में उद्यमिता विकास, नैतिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास में सहायक हो। बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के विभिन्न जिलों से अध्ययन हेतु आये छात्र-छात्रायें देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेकर इस क्षेत्र की पहचान बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा कृषि शिक्षा युवाओं के लिए कृषि के क्षेत्र में रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में लघु और सीमान्त कृषकों की संख्या) अधिक है। ऐसे कृषकों के पास औसतन एक हेक्टेयर से कम जोत है, बुन्देलखण्ड के अधिकांश क्षेत्रों में खेती हेतु सिंचाई जल और अन्य आवश्यक संसाधनों का अभाव है। बुंदेलखंड की धरती को दलहन और तिलहन की फसलों के अनुकूल माना जाता है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र देश के कुल दाल उत्पादन में लगभग 8.4 प्रतिशत का योगदान देता है। बुन्देलखण्ड में दालों का 52 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल वर्षा आश्रित है तथा दलहन के तहत सिंचित क्षेत्र, कुल क्षेत्रफल का केवल 13 प्रतिशत है। कषि क्षेत्र में निवेश के अभाव में बुन्देलखण्ड के बड़े भू-भाग में खेती अभी भी परम्परागत रूप से की जाती है। बुन्देलखण्ड की कृषि उत्कृष्टता एवं उन्नतशीलता की ओर अग्रसर है। बुन्देलखण्ड में जैसे-जैसे कृषि में सुधार होगा वैसे-वैसे पूरा क्षेत्र समृद्धशाली बनेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कृषि, शिक्षा शोध एवं प्रसार गतिविधियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में योगदान हेतु कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन छात्र/छात्राओं ने आज उपाधि एवं पदक प्राप्त किये हैं तथा प्रबुद्ध संकाय सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि प्रबुद्ध जिन्होंने कड़ी मेहनत द्वारा इन विद्यार्थियों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा, ज्ञान, कौशल एवं मानवीय मूल्यों का समावेश किया है। आज उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को जीवन की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होना है तथा शिक्षा का समाजोपयोगी उद्देश्य बनाना होगा। मुझे आप सभी मेधावी विद्यार्थियों से आशा है कि आप इस विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान एवं कौशल से देश के सीमान्त एवं मध्यमवर्गीय कृषकों को खेती के उन्नत तरीकों द्वारा जीवन स्तर को सुधारने हेतु कृषकों का मार्गदर्शन करेंगें। हम सभी का मानना है कि कृषि एवं किसान विकास के बिना राष्ट्र को स्वालम्बी व विकसित बनाना संभव नहीं है। अतएव कृषि विकास एवं कृषक कल्याण को प्राथमिकता देना अति आवश्यक है। विश्वविद्यालय को अपने शिक्षा, शोध एवं प्रसार कार्यक्रमों को संसाधनों के संरक्षण एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तित करना होगा। इसके लिए उत्कृष्ट अनुसंधान केन्द्रों का सम्पदा अधिकार एवं जलवायु परिवर्तन जैसे अन्य विषयों की ओर भी विकास, मानव संसाधन, जैव प्रौद्योगिकी, सूचना तकनीकी, बौद्धिक विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों में उद्यमिता विकास एवं स्वरोजगार हेतु स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रयोगात्मक फसलोत्पादन, ग्रामीण कृषि कार्यानुभव कार्यक्रम एवं ग्रामीण उद्यान कार्यानुभव कार्यक्रम, कृषि औद्यौगिक सम्बद्धता कार्यक्रम एवं प्रायोगिक ज्ञान कार्यक्रम आदि का समावेश किया गया है जिससे अध्ययनरत् विद्यार्थी ग्रामीण व्यवस्थाओं, कृषिगत समस्याओं एवं तकनीकियों की उपयोगिता आदि कार्यों का व्यवहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें। कृषि विज्ञान केन्द्रों के साथ इस कार्यक्रम को सम्बद्ध करने से छात्रों को कृषकों की समस्याओं को निकट से देखने-समझने एवं स्वरोजगार प्रारम्भ करने के उचित अवसर प्राप्त हो सकेंगे। स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रयोगात्मक फसलोत्पादन कार्यक्रम के अन्तर्गत खरीफ व रबी मौसम में विभिन्न दलहनी फसलों का बीज उत्पादन करके छात्र/छात्राओं द्वारा सतत् अनुभव प्राप्त किया जा रहा है जिससे छात्र/छात्राओं को कौशल विकास के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त आधुनिक ई-पुस्तकालय, जे.आर.एफ. सेल, एरिस सेल, प्लेसमेंट एवं काउन्सिलिंग सेल तथा इंग्लिश क्लब के माध्यम से छात्रों को राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु तैयार किया. जा रहा है। यह प्रसन्नता का विषय है। विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण एवं प्लेसमेन्ट के माध्यम से रोजगार पाने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है साथ ही स्नातक एवं परास्नातक छात्र-छात्राएं सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं में भी चयनित हो रहे हैं जो विश्वविद्यालय की शिक्षा की गुणवत्ता को दर्शाता है। विश्वविद्यालय के शोध कार्यक्रम को गति देने के लिये वर्ष 2022 में प्रथम शोध परिषद् की बैठक करायी गई। विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक कृषि पद्धति, गाय की स्थानीय नस्ल केनकथा संरक्षण एवं संवर्धन, बकरी के बुन्देलखण्डी नस्लों के सुधार तथा बुन्देलखण्ड में पायी जाने वाली सब्जियों, फलों एवं स्थानीय अल्पप्रयुक्त फसलों पर शोध कार्य पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के शोध केन्द्रों को भी प्रभावी बनाने के लिये कई ढांचागत विकास कार्य किये गये तथा बीजोत्पादन कार्यक्रम के लक्ष्यों को बढाया गया है, जिससे किसानों को लाभ प्राप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि की समसामयिक एवं आवश्यक जानकारी को साझा करने हेतु बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा कृषकों, ग्रामीण युवकों एवं महिलाओं को विभिन्न जानकारियाँ जैसे कृषि के क्षेत्र में रोजगार के अवसर, कृषि उद्यमी एवं उद्यमिता विकास, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम व्यवसाय, औद्यगिक एकीकृत कृषि प्रणाली, कौशल विकास अधारित प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के माध्यम से दी जाती हैं। विश्वविद्यालय के प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र पर प्राकृतिक कृषि के प्रयोग प्रारम्भ किये गये हैं। इन केन्द्रों पर प्राकृतिक कृषि आधारित सेन्टर आॅफ एक्सीलेन्स स्थापित किया गया है।
बुन्देलखण्ड की परिस्थितियों को देखते हुये कृषि के क्षेत्र में अपार सम्भावनायें हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए कहा कि खाद एवं कीटनाशक का इस खेती में कम प्रयोग होता है तथा सिंचाई की भी कम आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को कम लागत में गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त होगा, जो कि किसानों की आय को बढाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष-2023 मिलेट वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें मोटे अनाज के उत्पादन को बढावा मिल सके। उन्होंने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि हमें वर्षा जल का संरक्षण एवं बचाव करना चाहिए। कृषि के क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था अपनाकर कृषि को और बढाया जा सकता है, मोटे अनाज के लिए बुन्देलखण्ड क्षेत्र वरदान साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय में जल संचयन के लिए कुल 14 जल संरक्षण सिंचाई संरचनाएं विकसित की गयी हैं, जिसमें परिसर का वर्षा जल संचयित किया जा रहा है।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि बेटी/बेटा में कोई अंतर नही समझना चाहिए तथा समाज को दहेज जैसे कुरीतियों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश प्रगति के पथा पर अग्रसर है तथा जी-20 देशों में भारत को पहली बार इसकी अध्यक्षता करने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि उ0प्र0 के 04 शहरों नोयडा, बनारस, लखनऊ व आगरा में वसुधैव कुटुम्बकम के अन्तर्गत विश्व को जोडने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
कुलाधिपति महोदया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं विश्वविद्यालय के उन समस्त विद्यार्थियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देती हूँ, जिन्होने आज यहाँ उपाधि एवं पदक प्राप्त किये हैं। सम्भावी अवस्थी को समस्त स्नातक पठ्यक्रमों में सर्वश्रेष्ठता प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। कृषि स्नातक पाठ्य क्रम में अभिषेक द्विवेदी को सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक, शिखा साहू को द्वितीय सर्वोच्च अंक मिलने पर रजत पदक तथा प्रशांत यादव को तृतीय सर्वोच्च अंक कांस्य पदक प्रदान किया गया। इसी क्रम में उद्यान स्नातक पाठ्यक्रम में योगेन्द्र को स्वर्ण पदक, अक्षत सिंह परिहार को रजत, विनायक त्रिपााठी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वानिकी स्नातक में पायल कुलश्रेष्ठ को स्वर्ण, अनिरूद्ध मुखर्जी को रजत, अनुराग मिश्रा को कांस्य पदक प्रदान किया गया। कृषि परास्नातक में पवन प्रजापति को स्वर्ण, गिरजेश जायसवाल को रजत, कु0 शैलजा को कांस्य पदक प्रदान किया गया। उद्यान परास्नातक में अर्चना उपाध्याय को स्वर्ण, प्रियंका नायक को रजत तथा रूद्र प्रताप मिश्रा को कांस्य पदक प्रदान किया गया। दीक्षांत समारोह में कुल 206 छात्र/छात्राओं जिसमें 159 स्नातक स्तर के तथा 47 परास्नातक छात्रों को उपाधि तथा 15 छात्र/छात्राओं को मेडल प्रदान किये गये। कार्यक्रम में उन्होंने उच्च प्रा0वि0 चहितारा बडोखर खुर्द के 15 छात्र/छात्राओं को बैग व स्पोटर्स किट तथा 20 आंगनबाडी कार्यकत्रियों को आंगनबाडी किट का वितरण किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0नरेन्द्र प्रतात सिंह ने विश्वविद्यालय का प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में इस शैक्षणिक सत्र में कुल 1190 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत् हैं जिनमें छात्राओं की संख्या कुल 176 है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ० त्रिलोचन महापात्र पूर्व सचिव कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने सम्बोधित करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र कृषि के क्षेत्र में सूक्ष्म व्यवस्था अपनाकर कृषि को और बढाया जा सकता है, वर्षा जल संचय इसके लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मोटे अनाज एवं दलहन, तिलहन के लिए यह क्षेत्र उपयोगी है। उन्होंने जल संचय पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में बढती हुई जनसंख्या एवं गिरते हुए भूगर्भ जल स्तर तथा ग्लोबल वार्मिंग को दृष्टिगत संघर्ष करना पड सकता है। अतः जल संचय करना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से कहा कि बरगद का बीज सूक्ष्म होता है, परन्तु पेड विशाल होता है, यह गुण सभी छात्रों में होना चाहिए।
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र्यक्रम में प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री श्री रामकेश निषाद, विशिष्ट अतिथि डॉ० मिल्खा सिंह औलख, कुलपति डॉ० नरेन्द्र प्रताप सिंह, आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल बांदा श्री आर0पी0सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री विपिन कुमार मिश्रा, जिलाधिकारी बांदा श्रीमती दीपा रंजन, पुलिस अधीक्षक श्री अभिनंदन सहित प्रबन्ध परिषद एवं विद्वत परिषद के सम्मानित सदस्यगण, आमंत्रित अतिथिगण, आंगनबाडी कार्यकत्रियों, पत्रकार बन्धुओं, विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारीगण, उपस्थित छात्र एवं छात्राएं, उपस्थित रहे।
