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कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बादा

कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा

 

माननीय उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जिला जज / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-बांदा डा० बब्बू सारंग जी के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा के तत्वावधान में आज दिनांक 10.09.2024 को बाल शिक्षा, बाल अधिकार तथा उ०प्र० मुख्यमन्त्री बाल सेवा योजना के सम्बंध में तहसील सदर बांदा के सभागार में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। विधिक जागरुकता शिविर की अध्यक्षता श्रीमान श्रीपाल सिंह, अपर जिला जज / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा की गयी।

 

श्री श्रीपाल सिंह, अपर जिला जज/प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा अपने सम्बोधन में कहा कि बच्चे किसी भ देश की मूल्यवान सम्पत्ति हैं। यदि उन्हे अनुकूल व समर्थ वातावरण प्रदान किया जाएं तो प्रत्येक बच्चा देश का एक जिम्मेदार नागरिक के रुप में पल्लवित हो सकता हैं। इस प्रकार समाज के समग्र विकास के लिए उपयुक्त बाल विकास बहुत महत्वपूर्ण हैं। बाल अधिकारों को उनके जीवन के सभी पहलुओं को समाहित करते हुए मुख्य रुप से चार वर्गों में बांटा गया हैं। 1 जीवन का अधिकार, 2-संरक्षण का अधिकार, 3-विकास का अधिकार तथा 4-भागीदारी का अधिकार। संविधान में बाल अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए संवैधानिक प्रावधनों के अनुरुप कानूनो को अधिनियमित किया गया हैं। जैसे नि :शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और सरंक्षण) अधिनियम-2015, लैंगिक अपराधों से बालको की सुरक्षा अधिनियम-2012 |

 

श्री राधेश्याम सिंह, तहसीलदार सदर बांदा द्वारा अपने वक्तव्य में कहा गया कि बाल अधिकारों की रक्षा और प्रोत्साहन के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे उपायों के क्रियान्वयन में बाल अधिकार संरक्षण अधि0-2005 द्वारा एक नये चरण में प्रवेश हो रहा हैं। यह राष्ट्रीय बाल आयोग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं बाल न्यायालयों के गठन का प्रावधान करता हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकें कि सभी कानून, नीतियां, कार्यकमों और प्रशासनिक तन्त्र बाल अधिकारों के दृष्टिकोण के अनुरुप हैं जैसा कि संविधान में प्रतिष्ठापित हैं।

 

श्रीमती सुमन शुक्ला, पराविधिक स्वयं सेवक ने अपने वक्तव्य में कहा कि बाल अधिकार

 

से जुड़े कानून, नीतियां, आयोग व सरकारी / गैर सरकारी संगठनों / संस्थानों द्वारा इस क्षेत्र में निरन्तर प्रयास किये जा रहें हैं। जिससे कुछ प्रमुख मुद्दों जैसे-बाल तस्करी, बाल अश्लील साहित्य एवं वैश्यावृत्ति के शिकार बच्चे, गुमशुदा बच्चें, मादक पदार्थो की तस्करी में जबरन संलिप्त बच्चे तथा भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चे आदि में बाल अधिकारों को लेकर सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं किन्तु अभी भी गरीबी आदि जैसी पुरानी समस्या से अलग बाल यौन उत्पीड़न, भिक्षावृत्ति, बाल अश्लील साहित्य, साइबर काइम जैसे प्रौद्योगिक चालित वर्तमान मुद्दों का निराकरण करने की आवश्यकता हैं।

 

श्री धनन्जय सिंह, नायब तहसीलदार-बांदा द्वारा भी उपस्थित श्रोतागणों को उ०प्र० मुख्यमन्त्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत बच्चों को शिक्षण व कल्याण हेतु मिलने वाली आर्थिक सहायता धनराशि के सम्बंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

 

इस शिविर में सुश्री कुसुम यादव-लिपिक, श्रीमती बुशरा खानम लिपिक, श्री राशिद अहमद – डी०ई०ओ०, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा एवं श्री शोभित निगम के साथ पराविधिक स्वयं सेवक श्री अशोक त्रिपाठी, सुश्री रिंकी अहिरवार व तहसील सदर बांदा के कर्मचारीगण व श्रोतागण उपस्थित रहें।

 

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