*जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा 2 दिन में अनशन के किसानों को कार्यवाही आश्वासन पर प्रशासन में ठोस असर क्यों नहीं*
बांदा जनपद के तहसील बबेरू के दर्जनों गांवों में सैकड़ों अन्ना हजारों की गम्भीर समस्या के समाधान हेतु अनेकोंबार समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक व ग्रामीणों द्वारा सम्बन्धित विभागीय कर्मचारी अधिकारियों सहित स्थानीय तहसील जिला प्रशासन सहित जनपद के माननीयों व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री भारत सरकार से किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे जानवरों को संरक्षित करवाने के लिए गुहार लगाई गई लेकिन मुख्य विकास अधिकारी सीडीओ साहब बांदा के संरक्षण में गौवंशों के नाम से आनेवाली धनराशि का बड़े स्तर पर बन्दरबाट में संलिप्त कर्मचारी अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार को गुमराह करने पर कोई कसर नहीं छोड़ी जिम्मेदार अधिकारियों का बार बार यही कहना था कि बांदा जिले की बबेरू तहसील में कोई गौवंश अन्ना छुट्टा जानवर नहीं जबकि हकीकत जमीनी वास्तविकता यह है कि सैकड़ों अन्ना जानवर छुट्टा घूम घूम कर किसानों की फसलों को चौपट कर रहा है जिससे किसान बहुत ही परेशान हताश निराश होकर दर दर की ठोकर खा रहा है लेकिन मुख्य विकास अधिकारी सीडीओ बांदा की कार्यप्रणाली से किसान भुखमरी आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार गौ संरक्षण हेतु करोड़ों रुपए भेज कर गौशालाओं में अन्ना हजारों को संरक्षित करवाने तथा उनके भरण पोषण हेतु सतत प्रयास जारी किए हैं वहीं सरकारी नौकरशाही अफसरों के द्वारा लगातार आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है किसानों की समस्या से पीड़ित क्षेत्रीय समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक ने अन्ना जानवरों को संरक्षित करवाने का बीड़ा उठाया उसी क्रम में ब्लॉक तहसील जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों व माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत सरकार को पत्राचार करके कई बार निवेदन किया किंतु 6 माह तक लगातार प्रयास करने के बाद भी समस्या जस की तस होने के कारण मजबूर होकर चिलचिलाती गर्मी बबेरू तहसील के ग्राम पल्हरी में भूख हड़ताल आमरण अनशन पर बैठ गया 4 दिन बाद प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की नींद खुली और आनन फानन में अनशन स्थल पहुंच कर जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल जी की अगुवाई में 2 दिनों में समाधान का आश्वासन देकर भूख हड़ताल आमरण अनशन समाप्त कराया गया लेकिन आश्वासन के चार दिन बीत जाने के बाद प्रशासन के तरफ से मात्र अभी पत्र ही जारी हो पाया है न कि कोई जमीनी कार्य आखिर जिले के प्रथम नागरिक के महत्वपूर्ण पद पर आसीन जनप्रतिनिधि के द्वारा दिया गया किसानों को आश्वासन भरोसा कोरा कागज साबित करने में क्यों लगे हैं जिम्मेदार कर्मचारी अधिकारी जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष जी ने डीएम बांदा जे रीभा जी से जरिए मोबाईल फोन वार्ता के क्रम में किसानों को आश्वासन देते हुए भूख हड़ताल खत्म कराया था जिम्मेदार प्रशासन के द्वारा की जा रही बार बार हीलाहवाली मनमानी पर कब होगी ठोस कार्यवाही ताकि कर्मचारी अधिकारियों को अपने दायित्व के अनुसार कार्य करने का आदेश फर्जी न साबित हो सके जिला प्रशासन क्या जानबूझ कर जिला पंचायत अध्यक्ष के घर किसानों को अनशन के लिए मजबूर कर रहा है