खरीद केंद्रों से किसान को जब भगाया जाता है और किसान का धान नहीं खरीदा जाता बस यहीं से शुरू होता है खेल और किसान का उत्पीड़न घिनौना खेल किसानों को ठगने का जों की मीलरो द्वारा खेला जाता है सरकार के नाक के नीचे और सरकार अनजान बनी रहती है
बांदा आपको बताते चलें जैसे ही धान क्षेत्र में लगी मिलर वह प्राइवेट खरीददार वह सरकारी तंत्र के के कर्मचारी आपस में मिलकर एक ऐसा खेल खेलते हैं जिसकी कानो कान खबर जिले के बड़े अधिकारियों वह प्रदेश सरकार को नहीं लग पाती है उसका सीधा कारण है खरीददारी से जुड़े जो भी विभागीय कर्मचारी है सभी की सांठगांठ रहती है मिलर और कुछ दलाल किसानों की हक की कमाई खुद ही डकार जाते हैं उसका सीधा कारण यह है की किसान कुछ चंद पैसों के लालच के कारण अपने जमीन के कागजात अपना खाता प्रयोग के लिए उन दलालों को दे देते हैं जिससे वह दलाल 5 से 6 परसेंट तक आसानी से कमाते हैं मिलर और दलाल मिलकर के करोड़ों रुपए का चूना सरकार को लगाते हैं जिसकी भनक सरकार को नहीं लग पाती परंतु सरकार द्वारा किसानों के लिए जो पैसे अधिकृत किए जाते हैं वह पैसे व्यापारी कर्मचारी और मिलर मिलकर डकार जाते हैं अगर सही मायने में जांच हो जाए तो कई मिलर कई दलाल और बहुत सारे अधिकारी कर्मचारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे अब देखना यह है बांदा की जिला अधिकारी दीपा रंजन का ध्यान इस ओर आता है कि नहीं परंतु अगर जांच की जाए बहुत कुछ साफ हो जाएगा और किसानों की गाढ़ी कमाई के लिए जो पैसा आता है उसकी बर्बादी नहीं
सच्चाई यह है कि जब किसान का धाम क्रय केंद्रों में नहीं खरीदा जाता फिर केंद्र प्रभारी सुझाव देता है कि तुम मिलर से बात करके अपना धान मिल में तुला दो और 30 कुंतल धान के बदले 60 कुंटल के कागज किसान को देना पड़ता है जिसमें 30 कुंतल व्यापारी जो मजबूर किसानों से 1500 खरीदता है वहीं धान सरकारी दर पर बेच देता है इसी तरह पल्लेदारी के नाम पर भी किसानों को चूना लगाया जाता है शासन के निर्देशानुसार ₹20 कुंतल उत्तर आई चुनाई का किसान को देना है परंतु किसानों से उतर आई चनाई तुलाई लोडिंग पक्का ₹50 कुंतल वसूला जाता है और यह ड्रामा नरैनी अतर्रा खुरहंड बिसंडा सभी जगह होता हैअगर इस बार ध्यान दिया जाएगा तो निश्चित बहुत से किसानों का भला हो जाएगा खबर विश्वस्त सूत्रों द्वारा रिपोर्ट केके दीक्षित