पीपल वृक्ष के जड मे तिल गुड मिश्रित जल मानसिक रूप से भी गिरायें तो शनि का शमन होगा। वास्तविक रूप मे छ: बजे के पहले चढा दें तो फल का क्या कहना। जिसमे आलस छोडकर अपनी कर्मठता सिद्ध कर दे , दानशीलता सिद्ध कर के अपनी विशालहृदयता और उदारता सिद्ध कर दे तो उसका शनिदेव कुछ नही बिगाडते ।ऊल्टे खुश होकर ऊतरने के बाद धन धान्य से युक्त कर देते हैं । सभी ग्रह जाते समय कुछ पुरस्कार देकर जाते हैं ।अब जितना उनको खुश किया जाय उतना कम सताते हैं और उतना ही बडा पुरस्कार देकर जाते हैं ।कष्ट तो देते है लेकिन भक्त को पता भी नही चलता ।ऊल्टे मजा आता है जैसे किसी प्रेमिका ने फूल फेंककर मारा हो। फूल से कितना चोट लगेगा ? लेकिन प्यार तो बढेगा। उसी प्रकार भक्त को कष्ट मे जीवन का वास्तविक अर्थ समझ मे आ जाता है ।ऐसा कष्ट और शिक्षण मनुष्य को विरक्ति और जीवन की असारता का भान कराता है ।जो जीवन मुक्ति की ओर ले जाता है अगर ऐसे समय मे भी धैर्यपूर्वक धर्म ,कर्म, भक्ति मे स्थिर रहा जाय। कोई ग्रह मन मस्तिष्क पर ही पहले अटैक करते हैं । वहाँ रिक्त स्थान या मार्ग न दें तो असर कम पडेगा।समुद्र की तरह ज्वार आयेगा नहलाकर चला जाएगा । जितना डरेगे उतना कष्ट पायेंगे। शान्त बैठे रहे तो वह आएगा निकल जाएगा। सबदिन होत न एक समाना। धर्म और संस्कार ऐसे समय मे शिथिल न हो और धैर्य धारण कर लें तो बडभागी हैं ।न्याय के देवता शनि महाराज सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक हैं ।जो दूसरे का हक अन्याय पूर्वक छीनता है उसी को कष्ट देते हैं ।आप अगर यह सोंचे कि हमारा धन है ।हम दूसरे को क्यों दें तो आप गलत हैं ।आपके धन मे दूसरे का भी हक है ।उदाहरणस्वरूप देव , ऋषि , पितर , ब्राह्मण, साधु, संत, रिश्तेदार, अतिथि, जरूरतमन्द , धर्म , समाज , राष्ट्र , सेवक ,माता पिता । जिनका हक अदा करना आवश्यक है। सेवक साक्षात शनिदेव हैं उनका हक ईमानदारी से प्रतिष्ठापूर्ण ढंग से अदा करना चाहिए ।उसके श्रम और प्रतिभा के आधार पर मूल्यांकन करके उसको उसका लाभ बिना मांगे देना चाहिए । उसकी समस्याओं जरूरतो का पूरा ख्याल रखना चाहिए ।इससे वह निष्ठावान और पूर्ण बफादार बन जाएगा जब लगेगा कि मालिक तो वह ही है , सब उसे ही करना है। फिर उसका काम दिखे न दिखे उसकी निष्ठा कुछ कम करने पर भी बहुत कुछ दे जाती है।मालिक के इस विश्वास के बाद भी अगर वह धोखा दे ,धुर्तई करे तो शनिदोष से ग्रसित हो जाता है। प्रभाकर चौबे चिंतक ।