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संपादकीय

नोट बंदी पर मोदी से सवाल क्यों नहीं किया गया

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल पहले जब पांच सौ और एक हजार का नोटबंद कर दो हजार का नोट जारी किया था तो उस समय सरकार और सत्तारूढ़ दल में किसी ने भी यह कहने की हिम्मत नहीं जुटाई थी कि नकली नोटों का चलन, आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग और काले धन की समस्या से निबटने के लिए एक हजार का नोट बंद करके दो हजार का नोट जारी करने का क्या औचित्य है? लेकिन अब यह सवाल उठाने की हिम्मत जुटाई है बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने।*

 

*बिहार की राजनीति से बाहर होने के बाद सुशील मोदी ने शायद पहली बार कोई संजीदा बात कही है। उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कहा है कि दो हजार के नोट का मतलब होता है कालाधन। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी विकसित देश में भी सौ से ऊपर की कोई करेंसी नहीं होती है, इसलिए दो हजार रुपए के नोट को तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए।*

 

*सवाल है कि जिस बात की जानकारी सुशील मोदी को है, उसे क्या प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार नहीं जानते होंगे कि विकसित देशों में सौ से ऊपर की मुद्रा नहीं होती है? क्या वे यह बात भी नहीं जानते हैं कि दो हजार के नोट का मतलब होता है काला धन? निश्चित रूप से वे यह बात जानते होंगे और उन्होंने सलाह भी दी होगी। फिर भी अगर मोदी सरकार ने दो हजार का नोट जारी किया तो जाहिर है कि उसका इरादा गलत रहा होगा।*

 

*पिछले दिनों खबर आई थी कि नौ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के दो हजार के नोट चलन गायब हैं। ये नोट न तो बैंकों में हैं और न ही चलन में। जाहिर है कि यह रकम काले धन के रूप में लोगों के पास जमा है। अब देखना है कि सुशील मोदी के इस ध्यानाकर्षण पर मोदी सरकार क्या कदम उठाती है। यह भी देखने वाली बात होगी कि सुशील मोदी का क्या होता है, क्योंकि भाजपा में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के फैसले पर किसी ने सवाल उठाने का साहस दिखाया है।*

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