राष्ट्र साधना के पथिक तथा स्मृतियों की धूप-छाँव का विमोचन
• संस्मरण जीवन को दिशा देते हैं : पद्मश्री बाबूलाल दाहिया
• राष्ट्र साधना भारत माता की अर्चना है : गोपाल भाई
चन उपरांत मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि संस्मरण जीवन को दिशा देते हैं। संस्मरण व्यक्ति को कुछ नया रचने-गुनने को प्रेरित करते हैं। संस्मरण लेखन के दौरान व्यक्ति अपने अतीत की यात्रा कर लेता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में गोपाल भाई ने कहा कि राष्ट्र साधना समाज रचना के लिए आवश्यक है। यह भारत माता की अर्चना वंदना का एक अंग है। क्रांतिकारियों की जीवनी समाज में प्रेरणा उत्पन्न करेगी। वहीं संस्मरण केंद्रित पुस्तक व्यक्ति को अपने जीवन में झांकने का रास्ता उपलब्ध कराएगी। उल्लेखनीय है की इन पुस्तकों की भूमिकाएं जितेंद्र शर्मा देहरादून एवं आलोक मिश्रा दिल्ली ने लिखी हैं। वही रामनगीना मौर्य लखनऊ और महेश चंद्र पुनेठा, उत्तराखंड ने शुभकामना टिप्पणी दी है। विमोचन के बाद सभी रचनाकारों को अंग वस्त्र, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया!