आखिर वास्तविक , वंचितों, शोषितों , पीड़ितों को कब समानता का अधिकार मिलेगा ?
देश को आजाद करवाने मे मंगल पांडे से लेकर पंडित मदन मोहन मालवीय तक, सुभाष चंद्र बोस से लेकर बाल_पाल_लाल तक सवर्ण समाज के क्रान्तिकारियों, बलिदानियों के योगदान से पूरा इतिहास भरा पड़ा है, लेकिन आजादी के बाद से आज तक वोट बैंक की कुटिल नीति के चलते धर्म निरपेक्षता की आड़ मे मुस्लिम समुदाय ,एवं सामाजिक समरसता के नाम से समाज को दलित,पिछड़े और अगड़े वर्ग मे बाटकर समुदाय विशेष _ के तुष्टिकरण की प्रक्रिया आज तक बदस्तूर जारी है, ऐसे मे सवर्ण समाज पूरी तरह से दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में जीवन यापन करने को मजबूर है।
सामाजिक समरसता के नाम से जो जातिगत आरक्षण की व्यवस्था मात्र दस वर्षों के लिए लागू की गई थीं, उस के कारण कुछ गिने_चुने व्यक्ति और उनके रिश्तेदार तथा परिवार के लोग ही पीढ़ी दर पीढ़ी लाभ उठा रहे हैं। वास्तविक वंचित, शोषित पीड़ित तो आज भी रोज कमाना रोज पकाना की स्थित मे ही जी रहे हैं। कुछ चतुर चालाक लोग चुनाव के समय उन्हें सब्ज_बाग दिखाकर उनसे वोट लेने और ताली बजवाने का ही काम करते हैं, परंतु सभी राजनीतिक दल इसका समर्थन करते हैं और हर दस साल मे इसे आगे बढ़ाते जा रहे हैं।
वर्तमान समय मे, सवर्णों को छोड़कर SC/ST/OBC /अल्पसंख्यक सभी को संविधान में आरक्षण के साथ ही साथ कुछ विशेष सुविधाएं प्राप्त हैं ।
वे हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के झाँसे में नहीं आते, इसीलिए भारतीय राजनीति में संवैधानिक रूप से सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं।अपने समुदाय के फायदे के लिये, मनचाहा कानून बनवा रहे हैं, संविधान में संशोधन करवा लें रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण, न्यूनतम शुल्क, निःशुल्क आवास व प्रशिक्षण,IAS, IPS PCS आदि के लिए निःशुल्क कोचिंग,
,आवश्यक पात्रता न होते हुए भी, आयु सीमा में छूट, नौकरियों में आरक्षण, प्रमोशन में भी आरक्षण,
ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलवाना,
SC/ST एक्ट पर कड़े कानून बनवा लेना आदि इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
उनके नेतागण सार्वजनिक रूप से राम/कृष्ण/हनुमान आदि को गालियाँ दे सकते हैं, उनके चित्रों को चप्पलों से पीट सकते हैं, वे खुले आम सवर्णों को बम्हना, ठकुरा, ललवा, बनिया कहकर गाली दे सकते हैं, वे खुले मंच से “तिलक, तराजू, पेन, तलवार …….! कहते हुए बेइज्जती कर सकते हैं,परंतु यदि किसी सवर्ण या ओबीसी ने सोशल मीडिया में भी कुछ पोस्ट कर दिया या किसी को जातिसूचक शब्द से संबोधित कर दिया तो गैर जमानती धाराओं में उसे जेल में बंद कर दिया जाएगा।
आज इस देश के कानून में SC/ST वर्ग का हर स्त्री/पुरुष/बच्चा कानूनी तौर पर भगवान है,उसने किसी भी बुजुर्ग से बुजुर्ग, सम्मानित सवर्ण या ओबीसी पर झूठा आरोप लगा दिया कि उसने उसका जाति सूचक अपमान किया है तो , वह प्रतिष्ठित सवर्ण या ओबीसी जेल के अंदर होगा। इस तरह के कानूनों के कारण एक तरफ तो कुछ चतुर_चालाक लोग बदले की भावना से या सरकार से मुआवजा प्राप्त के लिए इसका बड़ी मात्रा में दुरुपयोग कर रहे हैं,
(पिछले कुछ वर्षों के न्यायालीन
फैसलों को देखने से यह स्पष्ठ है
कि, sc,st एक्ट के लगभग 85%मुकदमे झूठे होते हैं,)
वहीं दूसरी तरफ समाज में दशकों से चली आ रही भाई _चारे की स्वस्थ परंपरा मे दरार बढ़ती जा रही है, और समाज में धीरे _धीरे गृह युद्ध की चिनगारी सुलग रही है।
वोट बैंक की कुटिल चाल के लिए तुष्टीकरण की नीति ने सवर्ण समाज से उच्च शिक्षा, नौकरियां, पदोन्नति, सरकारी ठेकेदारी, मुखिया, सरपँच, विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति इत्यादि के अधिकांश पद, घोषित/अघोषित आरक्षण के कारण छीन लिए गए हैं।
यह कितने बड़े आश्चर्य की बात है ! कि सत्तर सालों से आरक्षण का लाभ लेने के बाद भी, एक भी आरक्षित परिवार “सामान्य”श्रेणी मे वर्गीकृत नहीं हो पाया है, मंत्री, अधिकारी , उद्योगपति बनने के बाद भी जो सत्तर साल पहले दलित था वह आज भी दलित ही बना हुआ है, और छोटी सी पान की दुकान चलाने वाला सामान्य श्रेणी का परिवार आज भी सामान्य वर्ग मे ही है, और जातिगत आधार पर सभी सुविधाओं से वंचित है ।
इससे बड़ी असमानता और क्या होगी ! कि, एक एकड़ की जोत वाला सामान्य वर्ग के किसान का बेटा अगर अपनी मेहनत के बल पर किसी प्रतियोगी परीक्षा में 80% से ज्यादा अंक लाता है, तो भी एक दलित वर्ग के मंत्री के बेटे को, 40% अंक लाने पर भी प्राथमिकता दी जाएगी।
आप अपने देवी देवताओं का खुला अपमान सहते रहिये !
आपको ,आपके बच्चों के भविष्य को कानूनी तौर पर अंधकारमय बनाया जाता रहे, और आप उन राजनेताओं के तलवे चाटते रहिये !
यदि आपने जरा भी अपनी पीड़ा का इजहार किया , तो आप देशद्रोही, धर्म द्रोही, हिंदुत्व द्रोही घोषित कर दिए जाएंगे।
आज सवर्ण समाज को ऐसे किसी भी झांसे मे न आते हुए, देश की एकता,अखंडता और समाज की वास्तविक समरसता के लिए कमर कसते हुए उठ कर खड़े होने की महती आवश्यकता है ।
राष्ट्रकवि ,मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा था कि_
जिसको न निज गौरव
तथा निज धर्म का अभिमान है,
वह नर नहीं, नरपशु निरा,
और मृतक समान है।
अब सवर्ण समाज को अपने दोयम दर्जे की नागरिकता पर आवाज बुलंद करने की जरूरत है। इस मुहिम में असली वंचित, शोषित, पीड़ित _ दलित वर्ग के लोगों को भी जोड़ना है, जो पिछले सत्तर सालों से अपने समाज के चतुर_चालाक नेताओं के द्वारा छले जा रहे हैं।
यद्यपि कुछ तथा कथित चाटुकार लोग , अपने अधिकार की आवाज उठाने पर आसानी से उसे राष्ट्र द्रोही, हिंदुत्व द्रोही बना दिया जाने का प्रयास करेंगे, परंतु वास्तविक वंचित, शोषित, पीड़ित सवर्ण समाज को समानता के अधिकार के लिए राजनीतिक, सामाजिक, सभी क्षेत्रों मे संगठित होकर प्रयास करना ही पड़ेगा। ऐसा प्रयास न सिर्फ सवर्ण समाज के लिए बल्कि राष्ट्र की एकता अखंडता के लिए भी जरूरी है , क्योंकि अगर सवर्ण नहीं बचा तो न तो सनातन धर्म बचेगा और न ही देश की एकता और अखंडता कायम रहेगी।
