1.बढती जनसंख्या के कारण चारागाहो की कमी तथा बैल की जगह ट्रैक्टर से जुताई के कारण बैल की अनुपयोगिता।
2. कृत्रिम गर्भाधान के द्वारा उत्तम क्वालिटी के सीमेन से गर्भाधान होने एवं बाँची पैदा होने की पूर्ण संभावना।जिससे दुधारू पशुओ मे वृद्धि के साथ उससे अधिक दूध निकलना सुनिश्चित होना।
3 . उत्तम कोटि के साँढो का संरक्षक ।
उपरोक्त लक्ष्य की प्राप्ति हेतु देश मे उन्नत किस्म के देशी विदेशी साँढो को विशेष सुरक्षा और देखभाल के बीच सीमेन स्टेशनो मे रखकर उससे उत्तम क्वालिटी के सीमेन का संग्रहण कर नाईट्रोजन टैंक मे रखा जाता है। जो एक्सपायर नही होते बशर्ते उन्हें लिक्विड नाईट्रोजन टैंक की ठंड मे रखा जाय।
अगर किसी साँढ को कोई बीमारी हो जाय तो उसके सारे एकत्रित सीमेन नष्ट कर दिये जाते हैं ।
साँढ के उत्पन्नकर्ता साँढ एवं गाय के पूरा इतिहास को परखा जाता है। गाय जो जन्म देती है वह किसी बीमारी से तो ग्रसित नही थी एवं दूध कितना देती थी । यह जांच लेने पर ही साँढो को लिया जाता है तथा सीमेन निकालने मे प्रयुक्त होता है।
साँढो को साँढ पर ही सिखाया जाता है । उसको उत्तेजित करने के लिए गाय नही बांधी जाती।
सीमेन निकलते ही कर्मी उसे थैला लगाकर संरक्षित कर लेता है।
फिर लेबोरेटरी मे ऑटोमेटिक मशीनो से उसकी क्वालिटी जांचकर सीमेन स्टीक मे भरा जाता है तथा लिक्विड नाईट्रोजन मे डाला जाता है।
वहाँ वह सुरक्षित रहता है। अलग अलग किस्म के देशी विदेशी सीमेन के लिए अलग रंग के पाईप प्रयुक्त होते हैं ।
गर्भाधान के समय ए आई कर्मी गाय के गुदा मार्ग मे हाथ डालकर गोबर निकालता है फिर गर्भाशय मुंह को पकडकर उसमे योनि मार्ग गन पास कराकर गर्भाशय के अन्दर सीमेन इन्जेक्ट कर देता है। गर्भाशय मुंह को काफी अनुभवी ही पहचान पाते है उसके लिए प्रशिक्षित होने के साथ प्रैक्टिकल आवश्यक है।
ट्रेनिंग सेन्टर मे पशु की चिकित्सा और देखभाल की भी ट्रेनिंग दी जाती है। दवाईयो का प्रयोग भी बताया जाता है। प्रभाकर चौबे ।