बांदा आपको बताते चलें दीपक कुमार गुप्ता के ऊपर विकास प्राधिकरण ने यह आरोप लगाया है कि लगभग 700 वर्ग फीट के क्षेत्रफल में भूतल प्रथम तल का निर्माण कर लिया गया है स्थल पर कोई स्वीकृति नहीं दिखाई गई इसमें वाद संख्या 671/2022 वह वाद संख्या 672/2022 पर ध्वस्तीकरण करण की कार्रवाई के निर्देश विकास प्राधिकरण द्वारा दिया गया है जबकि उच्च न्यायालय का आदेश है कि कोई भी अगर भूखंड 1000 वर्ग मीटर या 1000 वर्ग मीटर से कम है तो उसमें नक्शे की कोई जरूरत नहीं होती दूसरा उच्चतम न्यायालय ने अपने एक आदेश में यह कहा है कि कोई मकान अगर 12 वर्ष से बना है और प्रार्थी उसमें काबिज हैं तो वह मकान उसका माना जाएगा भले ही मकान अवैध व सरकारी जमीन में ही क्यों ना हो तो जो मकान के लिए बांदा विकास प्राधिकरण आदेश दे रहा है ध्वस्तीकरण का वह मकान पैतृक मकान है वह 700व 1000 वर्ग मीटर में ही बना है इसकी पुष्टि विकास प्राधिकरण ने अपने नोटिस में कर चुके हैं दूसरी सबसे अहम बात यह है कि जहां घनी आबादी होती है और आबादी 50 वर्ष पुरानी होती है उस एरिया को एलो जोन एरिया माना जाता है ऐसी परिस्थिति में क्या वास्तव में कार्यालय बांदा विकास प्राधिकरण द्वारा जो नोटिस दीपक गुप्ता को उपलब्ध कराई गई है क्या सच में वह सही है जबकि दीपक गुप्ता के नाम जिन मकानों का जिक्र किया गया है वह मकान माता और पिता के नाम है जबकि नोटिस दीपक गुप्ता को दी गई है या तो विकास प्राधिकरण को मकान किसके नाम है यथा स्थिति की जानकारी नहीं है क्या सिर्फ किसी के कहने मात्र से नोटिस बना दी गई है अन्यथा की दृष्टि में अगर भूलेख खंडों का वर्णन किया जाता तो उसमें स्पष्ट हो जाता कि जमीन मकान किसके नाम है तब उनके नाम नोटिस दी जाती सोचने वाली बात यह भी है क्या उस एरिया में जिसमें विकास प्राधिकरण ने वर्णन किया है मोहल्ला पोंडा बाग अलीगंज बांदा में दर्शाया गया जोकि घनी आबादी का क्षेत्र है और अन्य किसी मकान में यह नियम क्या लागू नहीं होता सिर्फ दीपक गुप्ता के पैतृक मकान में ही अगर यह नियम लागू होता है तो बात समझ में नहीं आती और ऐसा प्रतीत होता है जैसे कार्रवाई द्वेष भावना से की जा रही हो अब देखना यह है कि विकास प्राधिकरण बांदा क्या माननीय उच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करता है और ध्वस्तीकरण का कार्य करने में सफल हो जाता है तो यह हमारे भारत के संविधान और नियमों की भी अनदेखी होगी क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा परंतु प्रथम दृष्टया कारवाई दोषपूर्ण समझ में आती है

