देश रत्न स्व:महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी एवं स्व : भूतपूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के जन्म दिवस पर उनका हार्दिक अभिनन्दन वन्दन , शतशत नमन
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आलेखक : प्रभाकर
चौबे ।
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मदन मोहन मालवीय जी को जो स्थान मिलना चाहिए था वह नही मिल पाया है अभीतक । वे एक त्यागी संत पुरूष थे ।
राजनीति मे तो भारत की आजादी के लिए शामिल हुए। लेकिन शिक्षा जगत मे उनके अवदान जैसे काशी हिन्दु विश्व विद्यालय बनाना उन्हे सनातन धर्म राष्ट्र शिक्षक एवं राष्ट्र के अभिभावक के रूप मे प्रतिष्ठित करता है। उनका कार्य आजादी की लडाई के अतिरिक्त सनातन धर्म की सुरक्षा के लिए था ।काँग्रेस को गाली देने वाले कमसे मालवीय जी को देखें जो ब्राह्मणवादी हिन्दुत्व के पुरोधा थे और काँग्रेसी थे ।चार बार काँग्रेस अध्यक्ष रहे।गांधी ने मालवीय जी को ही अपना गुरू माना। वे सरल हृदय के चौबे जी थे । निवास के आधार पर मालवीय टाईटल लगा।सन्ध्यावंदन करने वाले सदविप्र थे। वामन अवतार के बाद इतना दान प्राप्त करने वाला उनके जैसा कोई ब्राह्मण नही हुआ ।वैसे गया के पंडा लोग हुए थे सारे पहाड हीरा जवाहिरात के थे ब्रह्मा जी द्वारा प्राप्त ।शर्त था दूसरे से दान नही लेने का । लेकिन पंडा लोग दूसरो से दान लेने लगे तो सब शर्तानुसार सब पहाड पत्थर का हो गया। यह भी लोकहित मे किया ।दान नही लेते दूसरो से तो हिन्दुओ के पितरो का उद्धार कैसे होता ।सबने त्याग ही किया। न वामन ने शासन किया सुखोपभोग किया न मालवीय जी ने न परशुराम जी ने। गया के पण्डो ने धन के लोभ मे लोकहित नही छोडा। मालवीय जी ने आजीवन कुलपति रहकर काशी विश्वविद्यालय मे लगभग सभी संकायो का शिक्षण आरंभ कराया। यह मानवेतर कार्य था । उनका मानना था कि ब्राह्मण अगर सतर्क रहे तो सभी जातियो का कल्याण हो जाएगा कारण ब्राह्मण सभी जाति वर्गो से जुडे हैं।इसलिए काँग्रेस मे रहते हुए भी अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की स्थापना की ।चरित्रबल इतना था कि किसी ने नही रोका न टोका। आज तो साहस के साथ वोट बैंक छिटकने के डर से काँग्रेस जातिगत आरक्षण का विरोध करने का साहस तक नही करती जो सभ्य समाज के लिए कलंक की बात है। शतशत नमन राष्ट् संत महामना मदन मोहन मालवीय जी को उनके जन्मदिन के अवसर पर।
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