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संपादकीय

क्या खुरहंड मंडी जो धान की मिनी मंडी कही जाती है उपेक्षा का शिकार लगातार आखिर जनप्रतिनिधियों ने क्यों मोड़ा खुरहंड से लगाव

क्या खुरहंड मंडी जो धान की मिनी मंडी कही जाती है उपेक्षा का शिकार लगातार आखिर जनप्रतिनिधियों ने क्यों मोड़ा खुरहंड से लगाव………

खुरहंड धान की मिनी मंडी कही जाती है फिर भी उपेक्षा का शिकार जिन ट्रेनों का खुरहंड में ठहराव था कोरोना के बाद वह ट्रेनें नहीं रुकी और ना ही किसी ने पहल की

 

बांदा खुरहंड आपको बताते चलें कि कोरोना काल के बाद खुरहंड मैं पसीजर के अलावा कोई भी ट्रेन नहीं रुकती है कानपुर लखनऊ आने जाने वालों को होती है दिक्कत

व्यापारियों का कानपुर लखनऊ अन्य शहरों से रहता है आना जाना होता है । होती है भारी दिक्कतें

खुरहंड लगातार उपेक्षा का शिकार झेल रहा है कोई व्यक्ति अगर लखनऊ कानपुर जाना चाहे तो इस समय खुरहंड से कोई गाड़ी नहीं है आपको रात में बांदा या अतर्रा जाना पड़ेगा जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है और इस और सांसद जो कि रेलवे के बोर्ड के सदस्य होते हैं परंतु उनका निवास कर्वी चित्रकूट है जिससे उन्हें ज्यादा खुरहंड से मतलब नहीं है जबकि उन्हें मालूम होना चाहिए कि खुरहंड मिनी धान का कटोरा कहा जाता है और यहां व्यापारियों की आने जाने वाली संख्या कभी कम नहीं रही और रेलवे का राजस्व भी लगातार कभी अतर्रा से कम नहीं रहा फिर भी लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहा है और इस पर जनप्रतिनिधि मौन है

उस व्यक्ति के दर्द का एहसास जनप्रतिनिधियों को कभी नहीं होगा जो रात के 11:00 बजे लखनऊ से बांदा या कानपुर से बांदा आता है और बांदा से जब रात में कोई साधन नहीं होता उसे रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन में इस कड़कती ठंड में रात बिताना पड़ता है उसके उस दर्द को एहसास नहीं कर सकते यह बड़ी बड़ी लग्जरी गाड़ियों में चलने वाले जनप्रतिनिधि

इसी तरह अगर कोई चित्रकूट से या जबलपुर से आता है तो उसे अतर्रा में रुकना पड़ता है अतर्रा से भी कोई रात में साधन खुरहंड के लिए उपलब्ध नहीं होता है वहां भी उसे बस स्टॉप में या रेलवे स्टेशन में रात बितानी पड़ती है जनता के दर्द को कब एहसास करेंगे जनप्रतिनिधि क्या  रोड बनवा देने से विकास हो जाता है क्या सिर्फ विकास की यही परिभाषा होती है जिन जनता के वोटों से जनप्रतिनिधि जीतते हैं या उनके प्रति कोई वफादारी नहीं होती क्या आम जनता सिर्फ दर-दर भटकने के लिए होती है इस पर विचार जरूर होना चाहिए क्योंकि जनता है सब जानती है आपसे कह नहीं पाती वह अलग बात है कुछ डर के मारे नहीं कह पाते कुछ संकोच में नहीं कहते कुछ प्रेम में नहीं कहते परंतु इस समस्या का निदान कराना भी जनप्रतिनिधियों का काम है क्योंकि जनता आपकी है और उसका हर कष्ट आपका होना चाहिए

हम हर छोटी बड़ी समस्याओं से अवगत कराते हैं जिले के अधिकारियों को जिले के जनप्रतिनिधियों को आखिर आम जनता को समस्या कहां है समस्या का निदान कौन करेगा यह सभी जानते हैं परंतु उन्हें समस्या से अवगत कराना भी जनता का काम होता है और एक कलम का सिपाही पत्रकार भी जनता ही होता है क्योंकि कभी-कभी यह देखा गया है कि चिराग तले अंधेरा होता है क्योंकि उस चिराग को यह पता ही नहीं होता कि मेरी परछाई से जहां पर मैं रखी हूं उसके आसपास प्रकाश नहीं हो रहा इसलिए इस समस्या को जनता से जानकारी ली जाए और इस दर्द को एहसास किया जाए और जल्द ही बुंदेलखंड एक्सप्रेस जिसे इस समय रानी लक्ष्मीबाई एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता है उसका ठहराव अति आवश्यक है तथा इसी तरह लखनऊ जबलपुर एक्सप्रेस जोकि खुरहंड के व्यापारियों आम जनता वहीं छात्रों जो बड़े शहरों में या तो व्यापार कर रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं या प्रतियोगिता में भाग लेने जाते हैं अक्सर उन्हें इसी ट्रेन से जाना पड़ता है इसका भी ठहराव जनता के हितों को देखते हुए अति आवश्यक है

Passenger train in the Countryside near Pune India.

हम जनप्रतिनिधियों जिले के आला अफसरों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराना चाहेंगे कि जल्दी इस समस्या का निदान किया जाएगा

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