“ *नाबालिग मैना की रहस्यमयी मौत: वायरल रिकॉर्डिंग्स से खुल रहे सौदेबाजी के राज, न्यायिक जांच की उठी मांग”*
*ग्राम पंचायत मसुरी में मौत के बाद सौदे, दबाव और* *पुलिस भूमिका पर सवाल—* *समाज सेवक धीरज मिश्रा ने एसपी से की निष्पक्ष जांच की मांग*
*बांदा/नरैनी*
जनपद बांदा के ग्राम पंचायत मसुरी में हुई नाबालिग लड़की मैना की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में लगातार वायरल हो रही ऑडियो रिकॉर्डिंग्स ने न सिर्फ ग्रामीणों बल्कि प्रशासनिक तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाज सेवक धीरज मिश्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस अधीक्षक बांदा से मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
*मामला क्या है?*
बीते दिनों ग्राम पंचायत मसुरी में एक नाबालिग लड़की मैना की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
पीड़ित मां ने लड़की की मौत के हफ्ते बाद पुलिस अधीक्षक बांदा को दिए प्रार्थना पत्र में गांव के ही एक युवक और उसके साथियों पर अपहरण, बलात्कार और हत्या कर शव फेंकने की आशंका जताई थी।
इसके साथ ही मां ने शव को निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर क्षेत्राधिकारी नरैनी और उपजिलाधिकारी नरैनी ने भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचकर ग्रामीणों की मौजूदगी में शव को निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया।
वायरल रिकॉर्डिंग्स से उठे बड़े सवाल:
*पहली रिकॉर्डिंग:*
आरोपी के पिता और पीड़ित परिवार की एक महिला के बीच बातचीत में 40 हजार रुपए नगद और कुल 2 लाख में मामला “रफा-दफा” करने की बात सामने आ रही है। साथ ही यह भी दावा कि बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया गया।
*दूसरी रिकॉर्डिंग:*
एक महिला खुद को गिरवा थाने की महिला कांस्टेबल बताते हुए पीड़ित परिवार को धमकाती सुनाई दे रही है और शव निकलवाने की बात कह रही है।
*तीसरी रिकॉर्डिंग:*
मृतका के भाई और एक महिला के बीच बातचीत में 20 हजार रुपए और देने तथा थाने का पूरा खर्च आरोपी पक्ष द्वारा उठाने की बात कही जा रही है। साथ ही मामले को “कालरा (बीमारी)” से मौत बताने की कोशिश का जिक्र।
*चौथी रिकॉर्डिंग:*
मृतका के भाई और गांव की गुड़िया नाम की महिला के बीच बातचीत में “दरोगा पर दबाव”, बयान बदलने की योजना और 1.5 लाख रुपए पुलिस को तथा 30 हजार रुपए मां को देने जैसी बातें सामने आ रही हैं।
पुलिस और साजिश पर सवाल:
इन रिकॉर्डिंग्स के सामने आने के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या मामले को दबाने के लिए पैसों का लेनदेन हुआ?
क्या गिरवा थाना पुलिस को पहले से सूचना थी?
क्या किसी राजनीतिक साजिश के तहत दोनों पक्षों को भड़काया गया?
या फिर पुलिस प्रशासन की भूमिका ही संदिग्ध है?
*समाज सेवक की मांग:*
समाज सेवक धीरज मिश्रा ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आए और दोषियों को सजा मिल सके।

त एक, सवाल अनेक—क्या मैना को मिलेगा न्याय या रिकॉर्डिंग्स में ही दफन हो जाएगी सच्चाई?”