*दीपावली मेला को लेकर चित्रकूट में प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा है बृहद अतिक्रमण हटाओ अभियानलेकिन भरत घाट पर मंदाकिनी नदी और सरयू नदी को अतिक्रमित कर बनाए जा रहे इस चार मंजिला आलीशान होटल पर आखिर क्यों नज़रें इनायत नही हो रही हैं श्री मानों की*
चित्रकूट* मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन भूमि पवित्र नगरी चित्रकूट धाम में 22 अक्टूबर से शुरु हो रहे परंपरा गत पांच दिवसीय दीपावली मेला की व्यवस्थाओं तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चित्रकूट के विभिन्न धार्मिक स्थलों जैसे कि सती अनुसुइया, गुप्त गोदावरी,हनुमान धारा और कामदगिरि प्रदक्षिणा का प्रमुख द्वार मंदिर के आसपास बृहद अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है।जिससे कि मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को आने जाने के लिए सुगमता हो सके।प्रशासन की इस कार्यवाही में किसी को कोई आपत्ती भी नही है।लेकिन इसके साथ ही आम जनमानस के दिमाग में रह रहकर यह प्रश्न भी उमड़ रहा है कि आखिरकार प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने में पक्षपात पूर्ण कार्यवाही क्यों की जा रही है।जहां मंगलवार को राम मोहल्ला मंदिर की केवल बाउंड्री तोड़कर मंदिर की तरफ से किए गए बांकी के अवैध अतिक्रमण या फिर दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो किए गए अवैध कब्जे की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आंख उठाकर देखना भी गवारा नहीं समझा गया।जबकि राम मोहल्ला मंदिर द्वारा बड़े गेट के बगल से जनरेटर रखने के लिए अवैध रूप से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है,साथ ही ग्राम कामता के पुराने पंचायत भवन पर भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है।इसके अलावा मंदिर के कर्ता धर्ताओं द्वारा नगर परिषद की तीन पानी की टंकियों पर भी अवैध रूप से कब्जा करके रखा गया है।वही दूसरी तरफ मंदाकिनी नदी के भरत घाट पर संगीता शर्मा पत्नी अखिलेश शर्मा जो नगर परिषद उपाध्यक्ष की सगी चाची हैं,इनके द्वारा बनवाए जा रहे अवैध निर्माण पर आखिरकार क्यों किसी प्रशानिक अधिकारी की नजर इनायत नही हो रही है।जबकि पूर्व में मझगंवा एसडीएम पीएस त्रिपाठी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं बनाया जा रहा उक्त आलीशान होटल नियमों के विपरीत या नियमों को ताक पर रखकर बनाया जा रहा है।यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब उक्त निर्माणाधीन चार मंजिला आलीशान होटल अवैध या नियमों के विपरीत है,तब फिर यह चार मंजिल तक बनता किसकी कृपा से रहा।क्या यह न मान लिया जाए कि इस अवैध निर्माण की तरफ से सबने अपनी आखें मूंद लीं हैं।और आंखे कैसे मूंद ली जाती हैं।इसे आज के समय में समझना बहुत कठिन नहीं है। सालों से बनवाए जा रहे इस आलीशान होटल के अवैध निर्माण के लिए या तो प्रशासनिक अधिकारियों को मोटी रकम सुविधा शुल्क के रुप में मिल चुकी है।या फिर कोई बहुत ही बड़ा राजनैतिक दबाव है।जिसके चलते आए दिन भरत घाट में तफरी काटने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को जानते बूझते अवैध निर्माण दिखाई नही देता हैं।प्रशासनिक श्री मानों से निवेदन केवल इतना है जब अतिक्रमण के नाम पर गरीबों के झोपड़े हटाए जा रहे हैं।तब फिर इन दिग्गजों की तरफ भी नजरें इनायत फरमाएं।जिससे कि आम जनमानस को भी यह महसूस हो की प्रशासन किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रहा है।