बांदा, 02 जनवरी, 2023-
जिलाधिकारी श्रीमती दीपा रंजन की अध्यक्षता में कलेक्टेªट सभागार में उ0प्र0कृषि निर्यात नीति-2019 के अन्तर्गत जिला स्तरीय कलेस्टर सुविधा ईकाई के सम्बन्ध में बैठक सम्पन्न हुई
जिलाधिकारी ने जनपद बांदा से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढावा देने एवं किसानों तथा अन्य हितधारकों की आय बढाने के लिए एफ0पी0ओ0/एस0पी0सी0 के माध्यम से कलेस्टर गठित करने हेतु सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया गया। बैठक में कृषि जीन्स गेंहॅू, चावल, सरसों काली, अरहर एवं ताजी सब्जियों को उ0प्र0 कृषि निर्यात नीति-2019 के अनुलग्नक-1 में शामिल करवाने हेतु प्रस्ताव पर सहमति दी। उन्होंने जिला उद्यान अधिकारी बांदा को निर्देशित किया कि कोल्ड स्टोरेज/फूड प्रोसेसिंग यूनिट आदि के सम्बन्ध में प्रस्ताव तैयार कराया जाए। उन्होंने उप निदेशक कृषि को निर्देश दिये कि बांदा कृषि विश्व विद्यालय में निर्यात हेतु आवश्यक क्वालिटी टेस्टिंग के लिए लैब प्रस्ताव तैयार कराया जाए तथा नये इनवेस्टर की बैठक एवं एम0ओ0यू0 साइन करने हेतु कृषि विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया। उन्होंने जनपद बांदा से भौगोलिक उपदर्शन (जी0आई0टैग) की सम्भावित कृषि उत्पादों देशी अरहर व महा चिन्नावर चावल का (जी0आई0टैग) करवाने एवं जिला स्तर पर जी0आई0प्रोत्साहन कार्यों के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण हेतु जनपद स्तरीय समिति में जी0आई विशेषज्ञ एवं जनपद स्तरीय मण्डी समिति के सचिव को अतिरिक्त सदस्य नामित करने हेतु निर्देशित किया।
बैठक में इसबिन्द कुमार ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक बांदा (कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार) ने उ0प्र0 कृषि निर्यात नीति-2019 के अन्तर्गत दिये जाने वाले प्रोत्साहन अनुदान के सन्दर्भ में जानकारी देते हेतु बताया कि निर्यात कलेस्टर हेतु न्यूनतम 50हे0 की भूमि विकास खण्ड सीमा अन्तर्गत होनी चाहिए, जिसके लिए विभाग द्वारा 10 लाख रूपये की अनुदान राशि निर्यात दायित्व पूर्ण होने के उपरान्त प्रदान की जायेगी। प्रथम वर्ष में 40प्रतिशत तथा उकसे पश्चात 15 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से आगामी चार वर्षों में निर्यात होने पर राशि प्रदान की जायेगी तथा तालिका अनुसार क्षेत्रफल बढने पर धनराशि में 06 लाख रूपये की बढोत्तरी अनुमन्य होगी तथा कलेस्टर द्वारा उत्पादित कृषि जीन्स का स्थानीय उत्पादकता के अधार पर कुल उत्पादन न्यूनतम 30प्रतिशत मात्रा में निर्यात करना होगा।
क्लस्टर के निकट स्थापित होने वाले नवीन प्रसंस्करण ईकाईयों/पैक हाउस/शीत गृह/राइपेनिंग चेम्बर्स आदि के लिए निर्यात के टर्नओवर की 10 प्रतिशत अथवा रू0 25 लाख जो भी कम हो निर्यात प्रारम्भ करने के वर्ष से 05 वर्षों तक प्रतिवर्ष दिया जायेगा। क्लस्टर से कृषि जीन्स को क्रय कर मौलिक अथवा प्रसंस्कृत रूप में न्यूनतम 40 प्रतिशत निर्यात करना होगा तभी निर्यात दायित्व सिद्ध माना जायेगा। इस नीति के अन्तर्गत ऐसे समस्त निर्माता निर्यातक एवं मर्चेन्ट निर्यातक पात्र होगें जो उ0प्र0 से कृषि उत्पाद का निर्यात करेंगे एवं एपीडा के अन्तर्गत पंजीकृत होंगे। परिवहन अनुदान, वायुमार्ग अथवा जलमार्ग से निर्यात करने पर परिवहन अनुदान रू0 10 प्रति कि0ग्रा0 अथवा वास्तविक भाडे का 25 प्रतिशत जो भी कम हो (पोर्ट तक उत्पाद पहुंचाने का मार्ग व्यय सहित)। रेल मार्ग अथवा सड़क मार्ग से निर्यात करने पर परिवहन अनुदान रू0 05 प्रति कि0ग्रा0 अथवा वास्तविक भाडे का 25 प्रतिशत जो भी कम हो प्रदान किया जायेगा। परिवहन अनुदान मद में प्रतिवर्ष अधिकतम रू0 10 लाख प्रति निर्यातक/फर्म को देय होगा। मास और चीनी के निर्यात पर परिवहन अनुदान देय नही होगा। किसानो, एफ0पी0ओ0/एफ0पी0सी0 अथवा सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के अन्तर्गत गठित कृषक उत्पादक समूह से सीधे क्रय करने पर मण्डी शुल्क व प्रयोक्ता प्रभार एवं विकास सेस में शत्-प्रतिशत छूट दी जायेगी। अढतियों के माध्यम से खरीद करने पर मण्डी शुल्क व प्रयोक्ता प्रभार पर शत्-प्रतिशत छूट दी जायेगी परन्तु विकास सेस देय होगा। कृषि निर्यात और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबन्धन एवं प्रोद्योगिकी में डिग्री/डिप्लोमा/सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए उ0प्र0 में स्थित विश्व विद्यालयों/सरकारी संस्थानों में वार्षिक फीस का 50 प्रतिशत अथवा रू0 0.5 लाख प्रतिछात्र दिया जायेगा। उच्च शिक्षा कार्यक्रम प्रारम्भ करने वाले राजकीय संस्थानों को एक मुश्त रूपये 50 लाख अनुदान दिया जायेगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वेद प्रकश मौर्या, उप कृषि निदेशक
डाॅ0 विजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, कृषि विपणन सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान अस्लम खान, रामदुलारे, एफ0पी0ओ0 से अरूण कुमार, अखिलेश पाठक उपस्थित रहे।
